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आईटी और BPO की नौकरियां 4 साल में हो जाएंगी खत्म, फिर विकल्प क्या होगा; भविष्यवाणी करने वाले ने ही बताया

भविष्य में यदि वे दुनिया भर को AI सर्विसेज मुहैया करा सकेंगी तो उनके लिए बचे रहना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई भी भविष्यवाणी करना कठिन है, लेकिन हमारा अनुमान है कि 2030 से 2035 तक आईटी और बीपीओ का बिजनेस समाप्त हो जाएगा।

मशहूर भारतीय अमेरिकी कारोबारी और इन्वेस्टर विनोद खोसला ने बड़ी भविष्यवाणी की है। उनका कहना है कि आईटी और बीपीओ सर्विसेज का भविष्य ज्यादा दिन का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग 2030 तक समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय आईटी कंपनियों को सलाह दी है कि यदि वे भविष्य में बने रहना चाहते हैं तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर तेजी से काम करें। भविष्य में यदि वे दुनिया भर को AI सर्विसेज मुहैया करा सकेंगी तो उनके लिए बचे रहना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई भी भविष्यवाणी करना कठिन है, लेकिन हमारा अनुमान है कि 2030 से 2035 तक आईटी और बीपीओ का बिजनेस समाप्त हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि हम अपने पुराने बिजनेस पर ही नहीं टिके रह सकते। इसकी बजाय हमें उन्हें नई सेवाएं देनी होंगी। खोसला ने कहा कि दुनिया अभी AI के साथ तालमेल बिठाने में उतनी सक्षम नहीं है, जितना भारत है। अहम बात है कि उनके पास या तो पश्चिम से तकनीक लेने का विकल्प है, जो बहुत महंगा है। या फिर अफ्रीका और साउथ ईस्ट एशिया के देश हैं, जिनके पास जानकारी काफी कम है। खोसला वेंचर्स के संस्थापक ने कहा कि भारतीय कंपनियां पूरी दुनिया में AI सर्विसेज दे सकती हैं। यह हमारे लिए सबसे अच्छा अवसर है। मुख्य बात यही है कि जो इस समय में तेजी से आगे बढ़ेंगे या बदलाव को स्वीकार करेंगे, उनके पास ही अवसर होंगे।

विनोद खोसला ने इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में इस सवाल का भी जवाब दिया कि यदि AI की स्पीड बढ़ी तो नौकरियां कम होंगी और उससे बचने का रास्ता क्या है। उन्होंने कहा कि हर देश आने वाले समय में इस मामले में गति पकड़ेगा। आप देखेंगे कि एआई के चलते उत्पादकता बढ़ेगी और कम लोगों की जरूरत होगी। अगले 15 साल इस दुनिया के लिए अहम होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चीजें और मनोरंजन सस्ते हो जाएंगे। यदि हम देखें तो 2050 तक काफी बदलाव हो जाएंगे। यही नहीं उन्होंने भारत के लोगों की सुविधा को लेकर भी बात की।

‘AI से हर भारतीय को मिलेगा पर्सनल डॉक्टर और किसानों को वैज्ञानिक’

खोसला ने कहा कि ऐसा भी संभव हो सकता है कि हर भारतीय के पास अपना एक पर्सनल डॉक्टर हो। यह हर वक्त उपलब्ध होगा। इससे नागरिकों के लिए हेल्थकेयर की सुविधा थोड़ी सस्ती हो जाएगी, जो फिलहाल काफी महंगी है। यह सिस्टम आधार से लिंक हो सकता है। इसके अलावा देश में 25 करोड़ बच्चे हैं, जो AI ट्यूटर का ही इस्तेमाल करते हुए पढ़ाई कर सकते हैं। देश में लाखों किसान हैं, जो बेहद छोटी जोत में काम करते हैं। उनके पास ज्यादा समझ नहीं होती। ऐसे लोगों को कृषि वैज्ञानिक जैसी सेवाएं एआई के माध्यम से मिल सकती हैं।

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मुसलमानों को नौकरी और पढ़ाई में मिलने वाला 5 प्रतिशत आरक्षण रद्द, इस राज्य का बड़ा फैसला

विशेष पिछड़ा वर्ग (ए) के अंतर्गत आने वाले सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूह के लिए सरकारी, अर्ध-सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी पिछले निर्णय और अध्यादेश रद्द कर दिए गए हैं।

 

मुसलमानों को नौकरी और पढ़ाई में मिलने वाला 5 प्रतिशत आरक्षण रद्द, इस राज्य का बड़ा फैसला

महाराष्ट्र में नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिम समुदाय के लोगों को दिए जाने वाले 5 प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया गया है। सरकार ने हाल ही में इसे लेकर एक आदेश जारी किया है। मंगलवार को एक गवर्नमेंट रेजोल्यूशन (जीआर) यानी शासकीय आदेश जारी किया गया है। इससे पहले 5 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित पिछले अध्यादेश की अवधि समाप्त हो गई है और उस फैसले पर अदालत द्वारा अंतरिम रोक लगा दी गई है।

गौरतलब है कि राज्य में कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की पिछली सरकार ने मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत और मुसलमानों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था। जुलाई 2014 में लाए गए इस अध्यादेश के तहत मुसलमानों को विशेष पिछड़ा वर्ग (ए) (SBC-A) कैटेगरी में डाला गया था और आरक्षण सरकारी नौकरियों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन पर लागू होता था।

 

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