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आबकारी अफसरों की प्रताड़ना से त्रस्त ‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’: 150 किमी दूर रायपुर पहुंचे बैगा आदिवासी; 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में चक्काजाम की चेतावनी

​नवा रायपुर/कबीरधाम: कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचलों से चिलचिलाती धूप में लगभग 150 किलोमीटर का लंबा और कष्टप्रद सफर तय कर ‘बैगा आदिवासी’ बुधवार को नया रायपुर स्थित ‘महानदी भवन’ (मंत्रालय) पहुंचे। विशेष रूप से संरक्षित और ‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’ कहे जाने वाले इन आदिवासियों का आरोप है कि कबीरधाम के आबकारी अधिकारी उन्हें झूठे शराब केसों में फंसाकर जेल भेज रहे हैं और उनसे भारी-भरकम अवैध वसूली कर रहे हैं।
​आक्रोशित बैगा समाज ने मुख्य सचिव, आबकारी सचिव और आबकारी आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर दोषी अफसरों एस.आई. रायजादा और एस.आई. गीता साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की गुहार लगाई है।
​7 दिन का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी

​छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद (कबीरधाम) के जिला अध्यक्ष कामू बैगा ने शासन-प्रशासन को दोटूक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर आबकारी विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों पर 1 सप्ताह (7 दिन) के भीतर दंडात्मक कार्रवाई और निलंबन नहीं हुआ, तो पूरा बैगा समाज अपने आत्मसम्मान और आजीविका बचाने के लिए सड़कों पर उतरेगा। इसके बाद कबीरधाम सहित पूरे प्रदेश में होने वाले चक्काजाम और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

​”ज़मीन गिरवी रखी, अनाज बेचा, फिर भी जेल भेजा”

​कामू बैगा ने रुंधे गले से समाज का दर्द बयां करते हुए कहा, “सरकार न्याय और सुशासन का दावा करती है, लेकिन हमारे सीधे-साधे और अनपढ़ लोगों को डरा-धमकाकर कोरे कागजों पर अंगूठे लगवाए जा रहे हैं। जेल के डर से लोग अपनी आजीविका का एकमात्र साधन यानी खेती की जमीन गिरवी रख रहे हैं और घर का अनाज औने-पौने दामों में बेचकर रिश्वत दे रहे हैं।”

​भ्रष्टाचार और जुल्म की दास्तान: ज्ञापन में दर्ज 5 बड़े मामले
​समरथ बैगा (ग्राम छेरकीकद्धार): घर में 5-6 लीटर पारंपरिक महुआ शराब थी, जिसे अफसरों ने कागजों पर 10 लीटर दिखाकर फर्जी केस बना दिया। अफसरों के खौफ से वे आज भी घर से लापता हैं और परिवार भूखों मर रहा है।

​शहरु बैगा (ग्राम चौंरा/भोरमदेव): अवैध रूप से पकड़कर डराया गया। परिवार ने दूसरों से कर्ज लेकर ₹10,000 की रिश्वत दी, फिर भी उन्हें 9 दिन तक जेल की यातना सहनी पड़ी।
​परसादी व सौखीराम बैगा (ग्राम सरोदा): शराब की मात्रा कागजों में 40 लीटर तक बढ़ा दी गई। दोनों ने परिवार का सालभर का अनाज बेचा और जमीन गिरवी रखकर ₹25,000 तक की अवैध रकम दी, फिर भी जेल भेज दिया गया।
​सुखचंद बैगा (ग्राम चोरभट्टी): शराब की झूठी मात्रा बढ़ाकर डराया गया। पैतृक जमीन गिरवी रखकर ₹25,000 की रिश्वत देने के बावजूद जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया।
​राजू साहू (ग्राम चिखली): घर पर छापे में कोई शराब नहीं मिली। फिर भी एस.आई. गीता साहू ने जेल भेजने की धमकी दी और जबरन कर्ज उठवाकर ₹20,000 की वसूली की।
​सर्व बैगा समाज की शासन से 4 प्रमुख मांगें
​तत्काल सस्पेंशन: आरोपी अधिकारियों (SI रायजादा और SI गीता साहू) को तुरंत निलंबित किया जाए ताकि वे गवाहों और पीड़ितों को डरा-धमका न सकें।
​FIR दर्ज हो: इन अधिकारियों पर विभागीय जांच के साथ-साथ SC/ST एक्ट (अत्याचार निवारण अधिनियम) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज हो।
​उच्च स्तरीय जांच: इन अधिकारियों के कार्यकाल में बैगा समाज पर दर्ज सभी मुकदमों की किसी स्वतंत्र उच्च अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
​रिश्वत की रकम वापस हो: आदिवासियों द्वारा जमीन गिरवी रखकर और अनाज बेचकर दी गई रिश्वत की राशि अधिकारियों से वसूल कर वापस दिलाई जाए।
​ये रहे मौजूद: ज्ञापन सौंपने के दौरान आदिवासी विकास परिषद के युवा अध्यक्ष मोहित कुमार धुर्वे, कमल कुमार धुर्वे, ओमकार सिंद्राम समेत पीड़ित ग्रामीण सौखी बैगा, समरथ बैगा, जयता बैगा आदि भारी संख्या में मौजूद रहे।

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