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इटली से रक्षा साझेदारी पर भारत सख्त, राजनाथ सिंह ने कहा-पाकिस्तान से दूरी रखो तभी बढ़ेगा सहयोग

भारत और इटली (India and Italy) के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति बनी है, लेकिन इस साझेदारी के बीच भारत ने अपनी सुरक्षा चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने साफ शब्दों में कहा कि अगर इटली को भारत के साथ मजबूत रक्षा सहयोग चाहिए, तो उसे पाकिस्तान के साथ किसी भी रक्षा तकनीक को साझा करने से बचना होगा।

मानेकशॉ सेंटर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राजनाथ सिंह और इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो के बीच विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच सह-विकास, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को लेकर अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।

पाकिस्तान को लेकर भारत की सख्त चेतावनी
सूत्रों के अनुसार, भारत ने इटली को याद दिलाया कि अतीत में उसने पाकिस्तान को कई रक्षा उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराई है—जिसमें नौसैनिक प्लेटफॉर्म, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश रहा है, ऐसे में उसके साथ किसी भी तरह का रक्षा सहयोग भारत के हितों के खिलाफ होगा।

इटली का भरोसा-भारत को मिलेगी एक्सक्लूसिव टेक्नोलॉजी
इटली की ओर से इस पर सकारात्मक संकेत दिए गए। गुइडो क्रोसेटो ने भरोसा दिलाया कि भारत को दी जाने वाली रक्षा तकनीक किसी तीसरे देश के साथ साझा नहीं की जाएगी और यह सहयोग ‘एक्सक्लूसिव’ रहेगा।

इतालवी कंपनी लियोनार्डो की वापसी
करीब एक दशक तक प्रतिबंध झेलने के बाद इटली की बड़ी रक्षा कंपनी लियोनार्डो की भारत में वापसी हो चुकी है। वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले (अगस्ता वेस्टलैंड केस) के बाद इस पर रोक लगाई गई थी। अब कंपनी भारत में नए प्रोजेक्ट्स की तलाश में है, जिसमें अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के साथ मिलकर नौसेना के लिए हेलीकॉप्टर निर्माण की संभावनाएं भी शामिल हैं।

टॉरपीडो और तकनीकी ट्रांसफर पर भी चर्चा
बैठक में भारतीय नौसेना द्वारा इतालवी कंपनी WASS से खरीदे गए भारी टॉरपीडो का भी जिक्र हुआ। दोनों देशों ने इस तकनीक के भारत में निर्माण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) की संभावनाओं पर भी विचार किया।

आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा
राजनाथ सिंह ने बताया कि यह साझेदारी ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूत करेगी। साथ ही, दोनों देशों ने भविष्य के लिए ‘मिलिट्री कोऑपरेशन प्लान (MCP) 2026-27’ पर भी सहमति जताई, जिससे सैन्य सहयोग और समन्वय को और बढ़ाया जाएगा।

कुल मिलाकर, भारत ने साफ संकेत दिया है कि रक्षा सहयोग के साथ-साथ उसकी सुरक्षा प्राथमिकताएं सर्वोपरि हैं और इसमें किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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