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किस जांच और सर्जरी पर कितना खर्च? अस्पताल के गेट पर ही दिखेगी रेट लिस्ट, मनमानी बिलिंग रोकने की तैयारी

Hospital Rate List Rules : अस्पतालों में इलाज के बाद मिलने वाले भारी-भरकम बिल से मरीजों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया है। अब अस्पतालों और संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज, जांच और दूसरी सुविधाओं की फीस साफ तौर पर प्रदर्शित कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे मरीज इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च की जानकारी ले सकेंगे और अपने बजट के हिसाब से फैसला कर सकेंगे।

अस्पतालों में ऐसी जगह लगानी होगी रेट लिस्ट

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे अस्पतालों में सेवाओं की दरें प्रदर्शित करने की व्यवस्था की समीक्षा करें। रेट लिस्ट ऐसी जगह लगाई जानी चाहिए, जहां मरीज और उनके परिजन उसे आसानी से देख सकें। इसमें स्थानीय भाषा के साथ अंग्रेजी में भी जानकारी देने पर जोर दिया गया है।

इलाज, जांच और सुविधाओं के खर्च की मिलेगी जानकारी

अस्पतालों को अपनी सेवाओं और उपलब्ध सुविधाओं की दरें स्पष्ट रूप से बतानी होंगी। इसका उद्देश्य मरीजों को इलाज के संभावित खर्च का अंदाजा पहले से देना है। इससे मरीज अलग-अलग सुविधाओं की फीस समझ सकेंगे और बिल को लेकर होने वाली गलतफहमी तथा विवाद कम करने में मदद मिल सकती है।

19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियम लागू करने पर जोर

मंत्रालय ने उन 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा है, जहां क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट लागू है। इस कानून के तहत संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को अपनी सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रदर्शित करनी होती हैं। वहीं, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कानून लागू नहीं है, वहां भी मौजूदा नियमों के जरिए अस्पतालों में फीस की जानकारी सार्वजनिक कराने पर जोर दिया गया है।

विदेशी मरीजों के लिए भी दिखाने होंगे पैकेज रेट

केंद्र सरकार ने मेडिकल और आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के इलाज से जुड़े पैकेज की दरें प्रदर्शित करने को भी कहा है। इससे विदेश से आने वाले मरीज इलाज कराने से पहले खर्च की तुलना कर सकेंगे और अपने लिए उचित विकल्प चुनने में मदद मिलेगी।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

अस्पतालों में फीस की जानकारी स्पष्ट रूप से मिलने से मरीज इलाज का बजट बनाने और उपलब्ध विकल्पों को समझने में बेहतर स्थिति में होंगे। इससे बिलिंग में पारदर्शिता बढ़ाने और इलाज के खर्च को लेकर होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह निर्देश अपने आप में सभी अस्पतालों की फीस तय करने या हर इलाज सस्ता करने का ऐलान नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य मरीजों को खर्च की जानकारी उपलब्ध कराना और मौजूदा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

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