chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के सभी थानों में अनिवार्य होंगे ‘चाइल्ड फ्रेंडली’ डिस्प्ले बोर्ड: आयोग का बड़ा निर्देश

रायपुर | प्रदेश के थानों में बच्चों के साथ होने वाले पुलिस व्यवहार को अधिक संवेदनशील और बाल-सुलभ (Child-Friendly) बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक निर्णायक कदम उठाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की पहल पर, राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों और रायपुर पुलिस कमिश्नर को एक महत्वपूर्ण अनुशंसा (आर-188) जारी की गई है।

प्रमुख निर्देश: 31 मार्च तक पूरी हो प्रक्रिया

आयोग ने निर्देशित किया है कि प्रदेश के प्रत्येक थाने में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी और बच्चों के आपातकालीन नंबर 1098 का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से किया जाए। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए 31 मार्च 2026 तक की समय-सीमा तय की गई है।

क्यों पड़ी इसकी आवश्यकता?

आयोग के संज्ञान में आया था कि कई मामलों में खुद पुलिस कर्मियों और थाना प्रभारियों को ही अपने क्षेत्र के नामित बाल कल्याण अधिकारियों की जानकारी नहीं होती। स्थानांतरण (Transfer) के बाद यह समस्या और बढ़ जाती है, जिससे बच्चों से जुड़े मामलों की जांच में ‘बाल सुलभ प्रोटोकॉल’ का उल्लंघन होता है।

कैसा होगा ‘डिस्प्ले बोर्ड’ का स्वरूप?

आयोग ने बच्चों के मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए बोर्ड का एक विशेष खाका तैयार किया है:

  • थाने की मुख्य दीवार पर काले रंग का आयताकार बोर्ड बनाया जाएगा, जिसकी बॉर्डर ‘स्लेट’ की तरह होगी।
  • पदनाम और हेल्पलाइन नंबर 1098 को पक्के सफेद रंग से लिखा जाएगा।
  • अधिकारियों के नाम चाक (Chalk) से लिखे जाएंगे, ताकि स्थानांतरण होने पर नए अधिकारी का नाम तुरंत बदला जा सके।

“किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 107 के तहत हर थाने में बाल कल्याण अधिकारी की नियुक्ति कानूनी बाध्यता है। जन-जागृति और बच्चों की सुरक्षा के लिए यह डिस्प्ले बोर्ड एक सेतु का काम करेगा।” आयोग की अनुशंसा से जवाबदेही तय

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल निर्देश नहीं बल्कि विधिक अनुपालन है। सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे इन बोर्डों की स्थापना के बाद उनके छायाचित्रों (Photos) के साथ आयोग को अपनी पालन रिपोर्ट प्रेषित करें।

Related Articles

Back to top button