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निष्पक्षता व पारदर्शिता लोकतंत्र की असली ताकत: बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि लोकतंत्र की मजबूती पीठासीन अधिकारियों की निष्पक्षता, मयार्दा और प्रभावी संचालन पर निर्भर करती है। लखनऊ में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राजनीतिक चेतना की धरती है और देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण यहां होने वाला लोकतांत्रिक मंथन विशेष महत्व रखता है।

ओम बिरला ने कहा कि इस सम्मेलन में देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों की जिम्मेदारी विधानमंडलों की गरिमा और प्रभावशीलता को बनाए रखना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी प्रतिभागी यहां से नई ऊर्जा लेकर लौटेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेंगे।

उन्होंने 2015 में हुए सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय विधानसभा को पेपरलेस बनाने, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और संस्थागत जानकारी जनता तक पहुंचाने पर गहन मंथन हुआ था। आज यह संतोषजनक है कि उस मंथन का देशभर में प्रभावी क्रियान्वयन हो चुका है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता के विश्वास को और अधिक विश्वसनीय तथा प्रमाणिक बनाना है। यह जिम्मेदारी केवल पीठासीन अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भी है। जनता की अपेक्षा होती है कि उनकी समस्याएं सदन के माध्यम से शासन तक पहुंचें और उनका समाधान हो। उन्होंने कहा कि विधायिका का मूल कार्य कानून निर्माण के साथ-साथ नीतियों पर गंभीर चर्चा करना है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और संसदीय प्रणाली इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने बताया कि विकसित भारत के विजन पर विधानसभा में लगातार 28 घंटे तक चर्चा हुई, जिससे साझा नीति निर्माण को बल मिला।ओम बिरला ने कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र की आत्मा हैं। सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही सार्थक और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस मौके पर कहा कि यह सम्मेलन विधायी आचरण को  नई दिशा देगा। यहां टकराव नहीं होना चाहिए। हम सबका लक्ष्य संवैधानिक संस्था को मजबूत बनाना है।  उत्तर प्रदेश की विधानसभा में आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और उप्र की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 86 वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ किया। यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश में चौथी बार आयोजित हो रहा है।

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ के मौके पर यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आमतौर पर राज्य की विधानसभा को यह अवसर लगभग 20 साल में एक बार मौका मिलता है। लोकसभा अध्यक्ष ने मेरे आग्रह को स्वीकार किया। इससे पहले 2015 में यूपी विधानसभा ने पीठासीन अधिकारी सम्मेलन की मेजबानी की थी। आज एक बार फिर हमें यह मौका मिला है। महाना ने कहा कि पहले यह कहा जाता था कि जब कुछ न आये तो नेता बन जाएं। अब बदल गया है, अब वही नेता बन सकता है जिसे सब कुछ आये। हमारी विधानसभा में डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, प्रोफेसर, किसान, बिजनेसमैन भी चुनकर आये हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी का योगदान है और सबकी अपनी सीमाएं हैं। अगले तीन दिन तक इस विधानसभा में जनता के प्रति जवाबदेही व अन्य विषय पर चर्चा होगी। मुझे विश्वास है कि यहां होने वाली चर्चा देश भर की विधानसभाओं में पहुंचेगी। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस कार्यक्रम के लिए आया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संदेश पढ़कर सुनाया।

इस अवसर पर यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को प्रतीक चिह्रन भेंट किया। मंचस्थ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, उप्र विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विधान परिषद के सभापति मानवेन्द्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का शाल ओढ़ा कर प्रतीक चिह्रन भेंट कर स्वागत किया गया।
सम्मेलन का समापन सत्र को 21 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे।
विधानमंडलीय परंपरा के तहत यह सम्मेलन प्रत्येक वर्ष किसी न किसी राज्य में आयोजित होता है। पिछली बार इसका आयोजन कर्नाटक में हुआ था। उत्तर प्रदेश में यह चौथी बार आयोजित किया जा रहा है, इससे पूर्व वर्ष 2015 में उप्र को इसके आयोजन की जिम्मेदारी मिली थी। इस सम्मेलन के साथ ही आज से ही विधानसभा और विधान परिषद सचिवों का अलग सम्मेलन भी हो रहा है।

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