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धान उपार्जन केन्द्रों की पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को मिल रही बड़ी सुविधा

डिजिटल टोकन प्रणाली से धान विक्रय प्रक्रिया बनी और सरल खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान सरगुजा जिले के धान उपार्जन केन्द्रों में पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था किसानों के लिए राहत लेकर आई है। डिजिटल प्रणाली के चलते किसानों को धान विक्रय में न सिर्फ समय की बचत हो रही है, बल्कि अनावश्यक परेशानी से भी मुक्ति मिली है। ग्राम पंचायत मेंड्राखुर्द के लघु सीमांत कृषक श्री त्रिभुवन राजवाड़े ने धान खरीदी व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने इस वर्ष 108 क्विंटल धान विक्रय हेतु पंजीकृत कराया है। उन्होंने कहा कि किसान तुहंर टोकन ऐप की मदद से घर बैठे 24×7 टोकन कटाने की सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें बार-बार समिति आने की जरूरत नहीं पड़ती। यह उनका दूसरा टोकन है, जिसके तहत उन्होंने 52.40 क्विंटल धान बेचा है। उपार्जन केंद्र पहुंचने पर किसानों को गेट पास, धान की नमी की त्वरित जांच, तथा बारदाने की तुरंत उपलब्धता मिल रही है, जिसके कारण धान विक्रय की प्रक्रिया तेजी से पूरी हो रही है और किसी प्रकार की देरी या कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ रहा। श्री राजवाड़े ने केंद्र की बेहतर सुविधाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि किसानों के लिए पेयजल, छाया में बैठने की व्यवस्था, तथा समिति कर्मचारियों का सक्रिय सहयोग उपलब्ध कराया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया सहज और किसान हितैषी बन गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों को प्रति क्विंटल 3,100 रुपये का सर्वाधिक समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की स्वीकृति मिल रही है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। अंत में कृषक श्री त्रिभुवन राजवाड़े ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था अत्यंत पारदर्शी, लाभकारी और किसान हितों को केन्द्र में रखकर संचालित की जा रही है। किसान इस बदलाव से बेहद संतुष्ट हैं।

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