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पश्चिम एशिया समुद्री मार्ग में संकट: बीच रास्ते से लौट रहे निर्यात जहाज, यूपी के व्यापार पर 3000 करोड़ का असर

लखनऊ । पश्चिम एशिया की ओर जाने वाले समुद्री मार्ग में बाधा उत्पन्न होने के कारण भारत से भेजे गए कई निर्यात जहाज बीच रास्ते से ही वापस लौटने लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने विशेष प्रक्रिया लागू करते हुए नया सर्कुलर जारी किया है। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार पर पड़ रहा है, जहां से खाड़ी देशों को बड़ी मात्रा में कृषि और औद्योगिक उत्पाद भेजे जाते हैं।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने 8 मार्च को जारी सर्कुलर में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आई रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग प्रभावित हो गए हैं। कई जहाज अपने तय गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और उन्हें वापस भारतीय बंदरगाहों की ओर लौटना पड़ रहा है।

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई जहाज भारतीय समुद्री सीमा के भीतर है या अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से बिना किसी विदेशी बंदरगाह पर रुके वापस लौटता है, तो उसे उसी भारतीय बंदरगाह पर लगने की अनुमति दी जाएगी जहां से वह रवाना हुआ था। ऐसे मामलों में कंटेनरों को उतारकर शिपिंग बिल और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर निर्यात आदेश (लेट एक्सपोर्ट ऑर्डर) को भी रद्द किया जा सकता है।

इसके अलावा जिन शिपिंग बिलों के आधार पर पहले ही निर्यात प्रोत्साहन जैसे आईजीएसटी रिफंड या ड्रा-बैक जारी हो चुके हैं, उनकी वसूली भी की जाएगी। साथ ही इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), डीजीएफटी और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ साझा की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश से बड़ी मात्रा में चावल, गेहूं से बने उत्पाद, मांस, डेयरी उत्पाद, कालीन, पीतल के सामान और रेडीमेड गारमेंट्स खाड़ी देशों को निर्यात किए जाते हैं। इनका अधिकांश परिवहन समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में जहाजों के लौटने या देरी से पहुंचने से निर्यातकों की लागत बढ़ने के साथ व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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