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डॉ. वर्णिका शर्मा के सख्त निर्देश, अक्षय तृतीया से पहले बाल विवाह रोकने पर जोर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में आगामी 19 अप्रैल 2026 को मनाए जाने वाले अक्षय तृतीया पर्व के दौरान बाल विवाह के मामलों में होने वाली संभावित वृद्धि को रोकने के लिए राज्य सरकार और संबंधित विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गए हैं। इसी कड़ी में 10 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने एक अहम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि “प्रिवेंशन इस बैटर देन क्योर” (Prevention is better than cure), इसलिए बाल विवाह की रोकथाम के लिए समय रहते सक्रिय और सख्त कदम उठाए जाएं।

स्थानीय बोली में प्रचार और 14 अप्रैल की ग्राम सभा पर फोकस

अपरान्ह 2:00 से 5:00 बजे तक चली इस मैराथन समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों और बाल संरक्षण अधिकारियों से ‘वन टू वन’ चर्चा की गई।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने बैठक के दौरान कुछ प्रमुख निर्देश दिए:

  • 14 अप्रैल को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभा में पंचायत स्तरीय अमले को बाल विवाह की रोकथाम के प्रति अनिवार्य रूप से जागरूक और सक्रिय किया जाए।
  • बाल विवाह रोकने के लिए टीमों का गठन कर उन्हें तुरंत मैदान में उतारा जाए।
  • बैठकों, मुनादी, दीवारों पर लेखन और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाए।
  • बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 (धारा 16 की उपधारा 3) के तहत अधिकारियों के कर्तव्यों को सरल भाषा में प्रसारित किया जाए।

Child Marriage Prevention: जिलों के शानदार नवाचार

बैठक के दौरान विभिन्न जिलों के अधिकारियों ने Child Marriage Prevention CG (बाल विवाह रोकथाम) को लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे बेहतरीन नवाचारों की जानकारी भी दी, जिसकी डॉ. शर्मा ने काफी सराहना की:

  • कांकेर: यहां ‘मेरी आवाज सुनो’ नामक कैंपेन चलाया जा रहा है। इसमें 17-18 वर्ष की बालिकाओं को अपनी समस्याएं और मन की बात खुलकर रखने के लिए एक सशक्त मंच दिया गया है, ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े।
  • बीजापुर: यहां ‘बीजा दूतिन’ के जरिए स्वयंसेवी किशोर-किशोरियां बालिकाओं को जागरूक कर रहे हैं कि बाल विवाह की स्थिति में उन्हें तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए।
  • सुकमा और जशपुर: सुकमा में स्थानीय ‘गोंडी’ भाषा और जशपुर में ‘सादरी व कुरुख’ भाषा में बाल विवाह रोकने के लिए शानदार प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। आयोग ने अन्य जिलों से भी ऐसी ही स्थानीयता अपनाने की अपील की।
  • गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही (GPM) और सूरजपुर: सूरजपुर जिले में बाल विवाह के मामलों में क्रमिक कमी देखी गई है। वहीं, जीपीएम जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा समुदाय) की एक बालिका द्वारा स्वयं अपना बाल विवाह रोकने के लिए दी गई पूर्व सूचना की काफी तारीफ की गई।

युवाओं का सहयोग और चाइल्ड हेल्पलाइन का उपयोग

अंत में, डॉ. वर्णिका शर्मा ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने अभियानों में स्वयंसेवी युवाओं का अधिक से अधिक सहयोग लें। इसके साथ ही, आम जनता और समाज के हर वर्ग तक चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की पहुंच सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी जागरूक नागरिक बाल विवाह की सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुंचा सके।

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