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कौड़ूटोला बना प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन का आदर्श मॉडल

संचालित यूनिट से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार

कलेक्टर ने किया अवलोकन, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता की सराहना

कौड़ूटोला बना प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन का आदर्श मॉडल

कौड़ूटोला बना प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन का आदर्श मॉडल

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड अंबागढ़ चौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत कौड़ूटोला आज ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन का एक सफल और प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है। यहां संचालित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दे रही है।

गत दिवस कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने यूनिट का अवलोकन कर यहां संचालित गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पुनर्चक्रण की व्यवस्थित प्रक्रिया को ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

प्लास्टिक कचरे छांटकर किया जा रहा पुनर्चक्रण
यूनिट में आधुनिक मशीनों की सहायता से प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक ढंग से प्रसंस्करण किया जा रहा है। विभिन्न ग्रामों के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्रों तथा कबाड़ विक्रेताओं से एकत्रित प्लास्टिक कचरे को छांटकर उसका पुनर्चक्रण किया जाता है। प्लास्टिक बोतलों की बेलिंग के साथ हार्ड प्लास्टिक से ग्रैन्यूल्स तैयार किए जाते हैं, जिससे अनुपयोगी कचरा उपयोगी संसाधन में परिवर्तित हो रहा है।

समूह की महिलाएं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस यूनिट की एक विशेष उपलब्धि यह है कि इसका संचालन ग्राम पंचायत सोनसायटोला के जय मां दंतेश्वरी स्व-सहायता समूह द्वारा सफलतापूर्वक किया जा रहा है। समूह की महिलाएं न केवल प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, बल्कि ग्रामीणों से उचित मूल्य पर प्लास्टिक कचरा खरीदकर उन्हें स्वच्छता अभियान से भी जोड़ रही हैं। इससे स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

अन्य ग्राम पंचायतों के लिए बना प्रेरणास्त्रोत
कौड़ूटोला की यह पहल स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों को धरातल पर साकार करते हुए पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के पुनर्चक्रण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यह मॉडल अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है तथा स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रहा है।

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