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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को मिला जनआंदोलन का स्वरूप, महिलाओं और विद्यार्थियों को किया गया जागरूक

महिला सुरक्षा, बाल अधिकार, साइबर सुरक्षा और शासकीय योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

महिला सुरक्षा, बाल अधिकार, साइबर सुरक्षा और शासकीय योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

राज्य में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत महिलाओं, किशोरियों और विद्यार्थियों को जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न जिलों में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सूरजपुर और बालोद जिले में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से महिला सुरक्षा, बाल अधिकार, बाल संरक्षण, वित्तीय साक्षरता तथा शासकीय जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर समाज में जागरूकता का संदेश दिया गया।

महिला सुरक्षा, बाल अधिकार, साइबर सुरक्षा और शासकीय योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के चेन्द्रा में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, मासिक धर्म स्वच्छता, बाल विवाह के दुष्परिणाम, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 एवं आपातकालीन सेवा 112 की जानकारी दी गई। साथ ही नोनी सुरक्षा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, महतारी वंदन योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर तथा वित्तीय साक्षरता से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए लॉवलीहुड कॉलेज में संचालित सिलाई, बुनाई, ब्यूटी पार्लर, कंप्यूटर सहित विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षणों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

वहीं बालोद जिले के पीएम श्री शासकीय स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गुंडरदेही में जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम-2012, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम-2015, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006, गुड टच-बैड टच, साइबर अपराध, बाल अधिकार तथा संकट की स्थिति में सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में लगभग 110 विद्यार्थियों ने भाग लेकर बाल सुरक्षा और कानूनी अधिकारों की जानकारी प्राप्त की।

राज्य सरकार द्वारा संचालित ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा शासकीय योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना है। साथ ही बाल विवाह, बाल श्रम, लैंगिक भेदभाव और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए समाज में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना भी इन अभियानों का प्रमुख उद्देश्य है।

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