
जापान और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से चिंता, विदेशी निवेश पर पड़ सकता है असर; भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर भी दबाव की आशंका
नई दिल्ली। दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने एक अहम चेतावनी दी है। उनका मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर महंगाई और छोटी अवधि की ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही बॉन्ड और ब्याज दरों से जुड़े बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है।
कोटक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड की यील्ड लगातार ऊपर जा रही है। जापान में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3 फीसदी के पार पहुंच गई है, जबकि अमेरिका में यह करीब 4.8 फीसदी के स्तर तक पहुंच चुकी है।
बढ़ता सरकारी कर्ज बनी बड़ी चिंता
उदय कोटक के मुताबिक, कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि बढ़ते सरकारी कर्ज के बीच केंद्रीय बैंकों को अपनी बैलेंस शीट बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में बाजार में अतिरिक्त तरलता और महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का क्या मतलब?
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर सिर्फ सरकारी बॉन्ड बाजार तक सीमित नहीं रहता। जब अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में निवेशकों को अपेक्षाकृत ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो वे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ओर रुख कर सकते हैं।
इसका असर भारत जैसे बाजारों पर भी पड़ सकता है। विदेशी निवेश कम होने पर भारतीय शेयर बाजार में दबाव बढ़ सकता है और घरेलू बॉन्ड की यील्ड में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत के सामने कई चुनौतियां
भारत के लिए मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां कई मोर्चों पर चुनौती पेश कर सकती हैं। एक तरफ प्रमुख देशों में बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है, तो दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भारत से विदेशी पूंजी के बाहर जाने का जोखिम बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव और शेयर बाजार के वैल्यूएशन पर असर पड़ने की संभावना रहती है।
जापान की बदली तस्वीर क्यों अहम?
जापान लंबे समय से बेहद कम ब्याज दरों वाली अर्थव्यवस्था रहा है। इस वजह से जापानी निवेशकों और संस्थानों ने विदेशों में बॉन्ड तथा अन्य परिसंपत्तियों में बड़े पैमाने पर निवेश किया।
अब यदि जापान में बॉन्ड यील्ड लगातार बढ़ती है, तो घरेलू बाजार में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में जापानी पूंजी का कुछ हिस्सा विदेशी बाजारों से वापस जापान की ओर लौट सकता है। इसका असर वैश्विक बॉन्ड बाजार और खासतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए क्या संकेत?
ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी का असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। विदेशी निवेशकों के लिए सुरक्षित और विकसित बाजारों में रिटर्न बढ़ने से भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश का जोखिम-रिटर्न समीकरण बदल सकता है।
ऐसे में विदेशी संस्थागत निवेश, रुपये की चाल, भारतीय बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजार के वैल्यूएशन पर नजर रखना जरूरी होगा।
निवेशकों को क्यों रहना होगा सतर्क?
उदय कोटक की चेतावनी का सीधा मतलब यह नहीं है कि बाजार में तुरंत बड़ी गिरावट आने वाली है। बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता की ओर इशारा है।
महंगाई, ब्याज दर, सरकारी कर्ज, कच्चे तेल की कीमत और केंद्रीय बैंकों की नीतियां आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं।
ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय वैश्विक संकेतों, ब्याज दरों और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।


