स्थानीय मुद्रकों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला, शासकीय मुद्रणालय की निविदा निरस्त

5 करोड़ टर्नओवर समेत कई कड़ी शर्तों पर जताई थी आपत्ति; नई निविदा में स्थानीय प्रिंटिंग इकाइयों को समान अवसर मिलने की उम्मीद
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय मुद्रणालय की नई निविदा को लेकर स्थानीय मुद्रकों की आपत्ति के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी विभाग ने 1 अगस्त को जारी निविदा को अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। स्थानीय मुद्रकों ने निविदा की पात्रता शर्तों को लेकर सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखी थीं।
दरअसल, शासकीय मुद्रणालय की करीब 400 करोड़ रुपए के मुद्रण कार्य से जुड़ी निविदा में कई ऐसी शर्तें रखी गई थीं, जिन्हें स्थानीय मुद्रकों ने अव्यावहारिक बताया था। इनमें न्यूनतम 5 करोड़ रुपए का वार्षिक टर्नओवर, वेब ऑफसेट मशीन सहित विभिन्न मशीनों की अनिवार्यता और 20 हजार वर्गफुट अधोसंरचना जैसी शर्तें शामिल थीं।
छोटी प्रिंटिंग इकाइयों के सामने थी बड़ी चुनौती
स्थानीय मुद्रकों का कहना था कि इतनी ऊंची पात्रता शर्तों के कारण प्रदेश की कई छोटी और मध्यम प्रिंटिंग इकाइयां निविदा प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पा रही थीं। उनका तर्क था कि शासकीय मुद्रणालय, छत्तीसगढ़ संवाद और छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम सभी सरकारी मुद्रण कार्य से जुड़े संस्थान हैं, लेकिन इनकी निविदाओं की पात्रता शर्तों में काफी अंतर है।
मुद्रकों ने मांग की थी कि शासकीय मुद्रणालय की निविदा की शर्तों को छत्तीसगढ़ संवाद की निविदा के अनुरूप तर्कसंगत बनाया जाए। इससे तकनीकी गुणवत्ता से समझौता किए बिना स्थानीय मुद्रण इकाइयों को भी काम हासिल करने का अवसर मिल सकेगा।
नई निविदा का इंतजार
सरकार की ओर से मौजूदा निविदा निरस्त किए जाने के बाद अब स्थानीय मुद्रकों को नई निविदा का इंतजार है। मुद्रण कारोबार से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि नई प्रक्रिया में ऐसी पात्रता शर्तें रखी जाएंगी, जिनसे स्थानीय सक्षम इकाइयां भी प्रतिस्पर्धा में शामिल हो सकें।
मुद्रकों का कहना है कि स्थानीय उद्योगों को अवसर मिलने से प्रदेश में रोजगार और कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं सरकार के इस फैसले के बाद अब नई निविदा में पात्रता शर्तों को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



