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सुप्रीम कोर्ट से अनुराग ठाकुर को मिली राहत, बीसीसीआई से जुड़ी गतिविधियों में ले सकेंगे हिस्सा,

नई दिल्ली ।  पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति दे दी है। इस नए आदेश के बाद अब उनके दोबारा क्रिकेट बोर्ड में किसी पद पर आने में कोई कानूनी बाधा नहीं रह गई है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी 2017 को अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटा दिया था। यह कार्रवाई क्रिकेट बोर्ड में सुधारों को लागू करने में कथित अड़चन डालने के चलते की गई थी।

दरअसल, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के कामकाज में सुधार के लिए एक समिति गठित की थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा कर रहे थे। लोढ़ा समिति ने 2016 में अपनी सिफारिशें अदालत को सौंपीं, जिन्हें लागू करने का निर्देश दिया गया। लेकिन बीसीसीआई की ओर से इन सिफारिशों को लेकर टालमटोल का रवैया अपनाया गया।

सुप्रीम कोर्ट उस वक्त तब नाराज़ हुआ था जब यह सामने आया कि अनुराग ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को एक पत्र लिखकर बीसीसीआई में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के प्रतिनिधि की नियुक्ति का विरोध करने को कहा था। चूंकि सीएजी प्रतिनिधि की नियुक्ति लोढ़ा समिति की अहम सिफारिशों में शामिल थी, इसलिए कोर्ट ने इसे अदालत को गुमराह करने की कोशिश माना और ठाकुर को अवमानना का नोटिस जारी किया गया।

हालांकि, 14 जुलाई 2017 को अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बिना शर्त माफी मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था।

अब ताजा सुनवाई में अनुराग ठाकुर की ओर से वरिष्ठ वकील पी एस पटवालिया ने दलील दी कि इतने साल बीत जाने के बाद उन्हें बीसीसीआई से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत का उद्देश्य कभी भी अनुराग ठाकुर को आजीवन प्रतिबंधित करना नहीं था। इसलिए, बीसीसीआई के नियमों के तहत वे बोर्ड की गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।

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