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UP में कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट, किसे मिलेगी जगह? अमित शाह ने बड़े नेताओं के संग की बैठक

पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के जरिए शाह ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने के लिए सरकार और संगठन को पूरी तरह तालमेल बिठाकर काम करना होगा।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त भारी हलचल है। राज्य कैबिनेट में फेरबदल और भाजपा संगठन में बड़े बदलावों की चर्चाओं के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को लखनऊ में प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक महत्वपूर्ण बंद कमरे में बैठक की। अमित शाह ‘यूपी दिवस’ समारोह का उद्घाटन करने के बाद एयरपोर्ट रवाना होने से पहले पार्टी मुख्यालय रुके। लगभग 30 मिनट तक चली इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के जरिए शाह ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने के लिए सरकार और संगठन को पूरी तरह तालमेल बिठाकर काम करना होगा। अगले एक साल तक चुनावी मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए योगी कैबिनेट में फेरबदल की प्रबल संभावना है। इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधना है। वर्तमान में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वी यूपी (गोरखपुर) से आते हैं। भाजपा नेतृत्व पश्चिमी यूपी और अन्य क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देकर इस असंतुलन को ठीक करना चाहता है। दिसंबर में पदभार संभालने वाले पंकज चौधरी को जल्द ही अपनी नई प्रदेश, क्षेत्रीय और जिला कमेटियों का गठन करना है। कैबिनेट और संगठन में जगह पाने की होड़ में दावेदार लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के चक्कर लगा रहे हैं। बैठक में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान पर भी चर्चा हुई। भाजपा के लिए चिंता का विषय यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी जिलों में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं। शहरी मतदाता भाजपा का मुख्य आधार माने जाते हैं, इसलिए दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व इस डेटा को लेकर काफी गंभीर है।
नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने से क्यों बढ़ गई भाजपा के पुराने नेताओं की बेचैनी?

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राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। चूंकि प्रभारियों का काम अनुभव के लिहाज से काफी अहम होता है इसलिए इसमें वरिष्ठ नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

BJP President Nitin Nabin New Team: नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद अब नई टीम को लेकर विमर्श चल रहा है। इसमें युवाओं व महिलाओं को तरजीह देने की बात चल रही है। इससे संगठन में काम कर रहे कई मौजूदा और पुराने नेताओं व भावी दावेदारों में बेचैनी है। कई नेताओं को उम्र के आड़े आने का डर भी सता रहा है। हाल में विभिन्न नेताओं को दी गई खास चुनावी जिम्मेदारियों से हाशिए पर रहे नेताओं में उम्मीद तो जगी है, लेकिन जब पूरी टीम बनेगी, तब कौन कहां होगा इसे लेकर ऊहापोह बरकरार है।  

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