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जहाँ राशन और जरूरतों के लिए भी तय करना पड़ता है 40 किलोमीटर का सफर… वहाँ पहुँची उपचार की दस्तक

जहाँ रोजमर्रा की ज़िंदगी भी संघर्ष है, वहाँ मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान बन रहा उम्मीद का सहारा

जहाँ रोजमर्रा की ज़िंदगी भी संघर्ष है, वहाँ मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान बन रहा उम्मीद का सहारा

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक बार फिर यह साबित किया कि संवेदनशील शासन केवल योजनाएँ नहीं बनाता, बल्कि उन अंतिम बस्तियों तक भी पहुँचता है जहाँ आज भी जीवन बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर बीजापुर जिले के पोंडुम की स्वास्थ्य टीम ने दुर्गम आश्रित ग्राम हकवा पहुँचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित हकवा तक पहुँचना आसान नहीं है। ऊँचे पहाड़, घने जंगल और कठिन पगडंडियों से होकर गुजरने वाले इस गाँव में आज भी सड़क, बिजली और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।

हकवा के ग्रामीणों की परिस्थितियाँ इस कदर चुनौतीपूर्ण हैं कि उन्हें दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएँ और राशन लेने के लिए भी लगभग 40 किलोमीटर पैदल चलकर पोंडुम पहुँचना पड़ता है। ऐसे दुर्गम और संसाधनविहीन क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम का पहुँचना ग्रामीणों के लिए केवल उपचार नहीं, बल्कि भरोसे और संवेदनशीलता की बड़ी मिसाल बन गया।

स्वास्थ्य शिविर के दौरान कुल 50 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 5 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच की गई, 2 मरीजों में मलेरिया की पहचान हुई तथा 3 ग्रामीणों की एनसीडी स्क्रीनिंग की गई। इसके अतिरिक्त अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित 40 ग्रामीणों को उपचार एवं आवश्यक परामर्श प्रदान किया गया।

दूरस्थ और पहुँचविहीन बस्तियों तक पहुँचती यह स्वास्थ्य सेवा केवल चिकित्सा सुविधा नहीं, बल्कि शासन की मानवीय प्रतिबद्धता और बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित करने के संकल्प की जीवंत तस्वीर बनती जा रही है।

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