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पीएम मोदी के 25 वर्षों के निरंतर नेतृत्व पर साय कैबिनेट ने पारित किया अभिनंदन प्रस्ताव

पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के 36 रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति

0आदिम जाति विकास विभाग’ अब ‘जनजातीय कार्य विभाग’ के नाम से जाना जाएगा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रविवार को राजधानी रायपुर में स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री निवास में आयोजित प्रेस वार्ता में मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी दी और प्रधानमंत्री श्री मोदी के 25 वर्षों के नेतृत्व का छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा पर पड़े व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस शुभ अवसर पर मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों की गौरवशाली सेवा यात्रा के अभिनंदन का शुभ प्रस्ताव पारित किया है। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और मंत्रिपरिषद की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी के कर्मयोग, जनसेवा और दूरदर्शी नेतृत्व का अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुदीर्घ राष्ट्रसेवा की कामना की।

गुजरात से शुरू हुए सुशासन के प्रयोगों ने देश और छत्तीसगढ़ को दिखाई नई राह

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शासन में टेक्नोलॉजी, जनसंवाद और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली के अनेक अभिनव प्रयोग किए। आगे चलकर इन सफल प्रयोगों को राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाया गया। वर्ष 2000 में अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ ने भी अपनी शुरुआती विकास यात्रा में ‘गुजरात मॉडल’ के सफल अनुभवों से सीखते हुए तेज गति से आगे बढ़ने का प्रयास किया। संवाद और ‘चिंतन शिविर’ जैसी कार्यसंस्कृति भी इसी सोच से प्रेरित रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गतिशक्ति ने आज परियोजनाओं की प्लानिंग और मॉनिटरिंग को टेक्नोलॉजी से जोड़ दिया है। छत्तीसगढ़ के लगभग 20 हजार गांवों में से करीब 14 हजार गांव जियो-रेफरेंस्ड किए जा चुके हैं।

निवेश और उद्योगों के लिए छत्तीसगढ़ में बना अनुकूल वातावरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वाइब्रेंट गुजरात’ ने देश के राज्यों को अपनी औद्योगिक एवं आर्थिक संभावनाएं दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की नई दृष्टि दी। इसी प्रेरणा के साथ छत्तीसगढ़ ने भी निवेश आकर्षित करने के लिए व्यापक संरचनात्मक और नीतिगत सुधार किए हैं।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ के माध्यम से औद्योगिक अनुमतियों को सरल बनाया गया है और निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल अर्थात स्वतः स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम से निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं और आसान हुई हैं।दो जनविश्वास अधिनियमों के माध्यम से 279 गैर-जरूरी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन की अनुमति दी गई है। राज्य में कुल मिलाकर 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन सुधारों और नई औद्योगिक नीति के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ को 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 1.60 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।

डिजिटल तकनीक से शासन हुआ अधिक पारदर्शी और नागरिक केंद्रित

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने टेक्नोलॉजी को सुशासन का प्रभावी माध्यम बनाया है। जनधन-आधार-मोबाइल यानी जैम की त्रयी से देश के 60 करोड़ लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से सरकारी सहायता बिना बिचौलियों के सीधे हितग्राहियों के खातों तक पहुंच रही है। यूपीआई ने छोटे व्यापारियों से लेकर आम नागरिकों तक डिजिटल भुगतान को सहज बनाया है।छत्तीसगढ़ में एग्रीस्टैक के अंतर्गत किसानों की 42 लाख फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से 7.51 लाख ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराए गए हैं।

किसानों की आय और कृषि अर्थव्यवस्था को मिला नया संबल

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ छत्तीसगढ़ के 26.57 लाख किसानों के खातों तक पहुंचा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 5,064 करोड़ रुपये का केंद्रांश प्रीमियम प्राप्त हुआ है।

वर्ष 2015 की तुलना में प्रदेश में पंजीकृत किसानों की संख्या 13.17 लाख से बढ़कर 27.53 लाख तथा पंजीकृत रकबा 21.26 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 33 लाख हेक्टेयर हो गया है। धान उपार्जन 59 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचा है। किसानों को एमएसपी के माध्यम से 33,431 करोड़ रुपये और बोनस के रूप में 10,292 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

महिला सशक्तीकरण और युवाओं को आगे बढ़ने के नए अवसर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। राज्य में 14 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनी हैं। ‘बिहान’ के माध्यम से 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़े हैं। वन धन विकास केंद्रों से 70 हजार से अधिक जनजातीय महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं।

युवा खिलाड़ियों के लिए खेलो इंडिया के अंतर्गत आठ जिलों में 48 करोड़ रुपये की सहायता तथा 33 खेलो इंडिया मिनी सेंटर स्वीकृत हुए हैं। बिलासपुर में हॉकी, आर्चरी और एथलेटिक्स के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्वीकृति मिली है।

*जनजातीय गौरव के साथ सुदूर अंचलों तक पहुंच रहा विकास*

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित कर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के जनजातीय समाज के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया है।धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ के 6 हजार से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में अधोसंरचना का विकास हो रहा है। पीएम जनमन योजना से प्रदेश के 18 जिलों में निवासरत पांच विशेष पिछड़ी जनजातियों के 56 हजार से अधिक परिवारों तक आवास, सड़क और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंची हैं।

प्रदेश के 26 जिलों में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। लघु वनोपज पर एमएसपी के माध्यम से छह लाख संग्राहकों को 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। नवा रायपुर में देश का पहला डिजिटल जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय स्थापित किया गया है।

सहकारी संघवाद से छत्तीसगढ़ के संसाधनों में अभूतपूर्व वृद्धि

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद को नई मजबूती मिली है। केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत की गई। पिछले 12 वर्षों में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय करों के अंश के रूप में 3 लाख 46 हजार 806 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो वर्ष 2004 से 2014 के बीच मिले 47,100 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 7.4 गुना है।

खनिज संपदा का लाभ स्थानीय क्षेत्रों और नागरिकों तक पहुंचाने के लिए बनाई गई डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन व्यवस्था से प्रदेश को 17,887 करोड़ रुपये मिले और 81 हजार से अधिक विकास कार्य किए गए। जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में एकीकृत बाजार की व्यवस्था बनी तथा छत्तीसगढ़ को 22,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जीएसटी क्षतिपूर्ति सहायता भी मिली।

सड़क, रेल, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए छत्तीसगढ़ में 35,766 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां मिली हैं तथा 18,215 करोड़ रुपये लागत की 37 परियोजनाओं पर कार्य जारी है। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।
सिक्स-लेन रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे छत्तीसगढ़ को बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ेगा। इसके साथ ही 4,007 करोड़ रुपये की लागत से बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव फोर-लेन मार्ग और 2,289 करोड़ रुपये की लागत से छह-लेन रायपुर-दुर्ग बायपास का निर्माण प्रगति पर है।रेल क्षेत्र में लगभग 54 हजार करोड़ रुपये की नई लाइन, दोहरीकरण, फ्लाईओवर एवं पुल परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। डिजिटल भारत निधि के माध्यम से सुदूर एवं जनजातीय क्षेत्रों में 1,643 मोबाइल टावर स्वीकृत हुए हैं।ऊर्जा क्षेत्र में लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। रायगढ़ के लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की क्षमता 4,000 मेगावाट से बढ़ाकर 4,800 मेगावाट की गई है। 2,808 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से 9.30 लाख घरों को नए विद्युत कनेक्शन मिले हैं। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1.16 लाख से अधिक घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं और इसके लिए 670 करोड़ रुपये की केंद्रीय सब्सिडी जारी हुई है।

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का नया अध्याय

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए सबसे बड़े गर्व और संतोष का विषय यह है कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस से 31 मार्च 2026 को प्रदेश को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली।मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ अब शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, पर्यटन, निवेश और आजीविका के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।

राष्ट्रहित में बड़े और साहसिक निर्णयों का दौर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के दृढ़ राष्ट्रीय संकल्प को दुनिया के सामने रखा है। वन रैंक वन पेंशन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का सृजन राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण निर्णय रहे हैं।अनुच्छेद 370 की समाप्ति से जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण संवैधानिक एकीकरण हुआ। औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर सामाजिक न्याय को भी मजबूती प्रदान की गई।

विकसित छत्तीसगढ़’ बनेगा ‘विकसित भारत 2047’ का मजबूत आधार

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के महासंकल्प में प्रभावी भागीदारी के लिए राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ का रोडमैप तैयार किया है।

पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 रिक्त पदों पर भर्ती को मंजूरी

मुख्यमंत्री श्री साय ने मंत्रिपरिषद के अन्य निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने पूर्व अग्निवीर सैनिकों के अनुभव, अनुशासन और दक्षता का लाभ राज्य की सेवाओं में लेने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

मंत्रिपरिषद ने पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के कुल 36 पदों पर उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध भर्ती की अनुमति प्रदान की है। राज्य शासन द्वारा पूर्व अग्निवीरों के लिए इन पदों पर 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है।

आदिम जाति विकास विभाग’ का नया नाम होगा ‘जनजातीय कार्य विभाग

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। इसके अंतर्गत ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम परिवर्तित कर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, जनकल्याण और विकास के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन को धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

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