पैकेज्ड फूड पर लाल चेतावनी: FSSAI के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट में बहस

पैकेज्ड फूड खरीदते समय अब स्वाद और ब्रांड के साथ उस पर लगे स्वास्थ्य चेतावनी लेबल पर भी ध्यान देना पड़ सकता है। पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक या फैट तय सीमा से ज्यादा होने पर फ्रंट पैक पर लाल रंग की स्वास्थ्य चेतावनी लगाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। इस मुद्दे पर FSSAI और याचिकाकर्ता वकील राजीव द्विवेदी के सुझावों में बड़ा अंतर सामने आया है।
FSSAI ने लाल हेक्सागन लेबल का दिया प्रस्ताव
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में पैकेज्ड फूड के फ्रंट पर लाल रंग का हेक्सागन लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसके फॉन्ट का आकार पीछे दी गई न्यूट्रीशन टेबल से एक पॉइंट बड़ा रखने की बात कही गई है।
शुरुआती प्रस्ताव में FSSAI ने कहा था कि चेतावनी लेबल तभी जरूरी होगा, जब किसी पैकेज्ड फूड में चीनी, फैट और नमक में से कम से कम दो पोषक तत्व तय सीमा से ज्यादा हों।
याचिकाकर्ता ने एक तत्व ज्यादा होने पर भी लेबल की मांग की
याचिकाकर्ता वकील राजीव द्विवेदी ने इस शर्त पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि अगर किसी पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक या वसा में से सिर्फ एक की मात्रा भी तय सीमा से ज्यादा है, तो उसके फ्रंट पर चेतावनी लगनी चाहिए।
उनके मुताबिक केवल दो पोषक तत्वों के तय सीमा से ज्यादा होने पर चेतावनी लगाने की शर्त पर्याप्त नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया में देरी पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट FSSAI और केंद्र सरकार की धीमी प्रक्रिया पर भी नाराजगी जता चुका है। कोर्ट ने कहा है कि बच्चों और आम लोगों की सेहत किसी भी कॉर्पोरेट मुनाफे से ज्यादा अहम है।
केंद्र सरकार ने तीन महीने के भीतर नियमों में बदलाव का भरोसा दिया है। इसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन, 2020 में जरूरी संशोधन किए जाने हैं।
फूड कंपनियां सर्विंग साइज को आधार बनाने के पक्ष में
करीब 100 अरब डॉलर की फूड मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने वाली AIFPA ने प्रस्तावित नियमों का विरोध किया है।
कंपनियों का सवाल है कि खतरे का आकलन 100 ग्राम या 100 मिलीलीटर के आधार पर क्यों किया जाए। उनका तर्क है कि लोग अचार जैसी चीजें 100 ग्राम नहीं, बल्कि एक बार में करीब 5 ग्राम खाते हैं। इसलिए चेतावनी तय करते समय सर्विंग साइज को भी देखा जाना चाहिए।
कंपनियों को यह भी डर है कि सख्त सीमा लागू होने पर नमकीन, भुजिया, समोसे और पापड़ जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ भी लाल चेतावनी के दायरे में आ सकते हैं।
बड़ी कंपनियां अपने उत्पादों का फॉर्मूला बदलने के लिए रिसर्च लैब का इस्तेमाल कर सकती हैं। लेकिन छोटे और कुटीर निर्माताओं के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा।
अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम दिशा-निर्देश का इंतजार
पैकेज्ड फूड में नमक, चीनी और फैट की मात्रा को लेकर अंतिम नियम क्या होंगे, यह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल FSSAI, याचिकाकर्ता और फूड इंडस्ट्री के प्रस्तावों में अंतर बना हुआ है।
अंतिम फैसला यह तय करेगा कि पैकेज्ड फूड के फ्रंट पर स्वास्थ्य चेतावनी किस स्थिति में लगाई जाएगी और ग्राहकों को खरीदारी के समय किस तरह की जानकारी साफ तौर पर दिखाई देगी।



