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बिहान से आत्मनिर्भरता की राह पर ग्रामीण महिलाएं, कलेक्टर ने सराही मेहनत और हुनर

दीप महिला समूह ने आधुनिक मल्चिंग पद्धति से पत्ता गोभी उत्पादन कर अर्जित किए 8 लाख रुपए, अब तीन एकड़ में कर रहीं टमाटर की खेती

फूलबाई ने पारंपरिक माटी कला को बनाया आजीविका का जरिया, हुनर से प्रभावित कलेक्टर ने कीमत देकर खरीदा मिट्टी का तवा

रायपुर,

बिहान से आत्मनिर्भरता की राह पर ग्रामीण महिलाएं, कलेक्टर ने सराही मेहनत और हुनर

ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी जीपीएम की महिलाएं खेती, पशुपालन और पारंपरिक कला-कौशल को आजीविका का माध्यम बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने महिलाओं से सीधे संवाद कर उनके व्यवसाय, उत्पादन, आमदनी और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली तथा उनकी मेहनत और हुनर की सराहना करते हुए गतिविधियों को और विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया।

कलेक्टर ने अमरपुर में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं से मुलाकात कर उनके द्वारा की जा रही आधुनिक खेती का अवलोकन किया। समूह की सदस्य श्रीमती रिंकी गुप्ता ने बताया कि महिलाओं ने लगभग तीन एकड़ भूमि लीज पर लेकर सब्जी उत्पादन को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया है। बेहतर उत्पादन के लिए समूह द्वारा आधुनिक मल्चिंग पद्धति अपनाई जा रही है। वर्तमान में महिलाएं टमाटर की खेती कर रही हैं।

श्रीमती रिंकी गुप्ता ने बताया कि इससे पहले समूह ने पत्ता गोभी का उत्पादन किया था, जिससे लगभग 8 लाख रुपए की आय अर्जित हुई। खेती से मिली इस आय ने समूह की महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया है और वे अब आधुनिक तकनीकों के उपयोग के साथ सब्जी उत्पादन को आगे बढ़ा रही हैं। कलेक्टर ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभकारी आजीविका में बदलने का यह प्रयास अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणादायक है।

इसके बाद कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने कोडगार के जय मां संतोषी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं से मुलाकात की। यहां समूह की सदस्य श्रीमती फूलबाई ने अपनी मेहनत और हुनर से आजीविका के कई साधन विकसित किए हैं। वे पोल्ट्री और शूकर पालन के साथ पारंपरिक माटी कला से मटका, दीया, पैना, गुल्लक और तवा सहित विभिन्न उपयोगी एवं कलात्मक वस्तुओं का निर्माण कर रही हैं।

श्रीमती फूलबाई द्वारा तैयार मिट्टी के उत्पादों को देखकर कलेक्टर ने उनके हुनर की प्रशंसा की। स्थानीय कारीगरी और उत्पादों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कीमत अदा कर मिट्टी से निर्मित तवा भी खरीदा। कलेक्टर के इस प्रोत्साहन से फूलबाई और समूह की अन्य महिलाओं का उत्साह बढ़ा।

श्रीमती फूलबाई ने बताया कि पशुपालन और मिट्टी के उत्पादों सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपए की आमदनी हो रही है। कलेक्टर ने उन्हें गतिविधियों का विस्तार कर आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने घर की छत पर पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने और पात्रतानुसार योजना का लाभ लेने का सुझाव भी दिया।

‘बिहान’ से जुड़ी इन महिलाओं के प्रयास यह दर्शाते हैं कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आधुनिक खेती के साथ स्थानीय और पारंपरिक हुनर को आजीविका से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। कहीं महिलाएं आधुनिक कृषि तकनीक से व्यावसायिक सब्जी उत्पादन कर रही हैं, तो कहीं माटी कला और पशुपालन के जरिए नियमित आमदनी अर्जित कर रही हैं।

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