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बैटरी ट्रायसायकल ने बदली 75% दिव्यांग सोमारू की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की राह आसान

सोमारू के लिए घर से बाहर निकलना, बाजार जाना या अस्पताल पहुंचना आसान नहीं था। दैनिक जरूरतों के लिए भी उन्हें परिवार के सदस्यों या ग्रामीणों की मदद लेनी पड़ती थी। लगातार दूसरों पर निर्भर रहने के कारण उनकी दिनचर्या सीमित हो गई थी। आवागमन की परेशानी का असर उनके आत्मविश्वास पर भी पड़ता था।

मोटराइज्ड ट्रायसायकल से आवागमन हुआ आसान

समाज कल्याण विभाग की बैटरी चलित (मोटराइज्ड) ट्रायसायकल प्रदाय योजना के तहत सोमारू को आधुनिक बैटरी चालित ट्रायसायकल मिली। इसके बाद उनके लिए घर से बाहर निकलना काफी आसान हो गया। अब वे स्वयं ट्रायसायकल चलाकर बाजार, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों तक जा सकते हैं।

इस सुविधा से उनकी दूसरों पर निर्भरता कम हुई है। वे अपने जरूरी काम खुद कर पा रहे हैं और समय तथा श्रम की भी बचत हो रही है। स्वतंत्र रूप से आवागमन की सुविधा मिलने से सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।

वाहन नहीं, आत्मनिर्भरता का सहारा

सोमारू का कहना है कि बैटरी चालित ट्रायसायकल उनके लिए सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन का सहारा है। इससे उन्हें अपने दैनिक कार्य खुद करने का आत्मविश्वास मिला है।

राज्य सरकार की दिव्यांगजन हितैषी योजनाओं के तहत जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का उद्देश्य दिव्यांगजनों को अधिक सुविधाजनक और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर देना है। सोमारू की कहानी इसी बदलाव को दर्शाती है, जहां एक सहायक उपकरण ने उनकी गतिशीलता बढ़ाने के साथ आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत किया है।

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