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योर मनी योर राइट’ अभियान के बावजूद केवल तीन फीसदी रकम ही लौट पाई

“27,824 से बढ़कर “67,004 करोड़ पहुंची अनक्लेम्ड जमा राशि

पब्लिक सेक्टर के बैंकों में सर्वाधिक 85% से अधिक रकम फंसी

नई दिल्ली। देश में अनक्लेम्ड बैंक जमा राशि लगातार बढ़ती जा रही है और यह आंकड़ा अब चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2025 तक बैंकों में पड़ी निष्क्रिय राशि बढ़कर “67,004 करोड़ हो गई, जो वित्त वर्ष 2020-21 में “27,824 करोड़ थी। यानी महज पांच वर्षों में यह रकम दोगुने से भी अधिक हो गई है। केंद्र सरकार और बैंकों द्वारा चलाए जा रहे ‘योर मनी योर राइट’ अभियान के बावजूद इस बड़ी राशि का बहुत छोटा हिस्सा ही खाताधारकों तक वापस पहुंच सका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2025 में जानकारी दी थी कि अभियान के तहत लगभग “2,000 करोड़ की राशि लोगों को लौटाई गई है, जो कुल अनक्लेम्ड जमा का करीब तीन फीसदी ही है। हालांकि बाद की प्रगति में यह आंकड़ा और बढ़ा है, लेकिन कुल जमा के मुकाबले वसूली अभी भी बेहद सीमित है।यह अभियान अक्टूबर 2025 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य लोगों को उनके निष्क्रिय बैंक खातों में पड़ी रकम वापस दिलाना है। इस पहल में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र के बैंक शामिल किए गए हैं। साथ ही, दावा प्रक्रिया को सरल बनाने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राहकों को एसएमएस और ईमेल के जरिए सूचित करें तथा आॅनलाइन माध्यम से दावे की प्रक्रिया को आसान बनाएं। अनक्लेम्ड जमा में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का दबदबा साफ दिखाई देता है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल निष्क्रिय जमा का लगभग 85 से 87 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं बैंकों में जमा है। इसका मुख्य कारण इन बैंकों का बड़ा ग्राहक आधार और वर्षों पुराने निष्क्रिय खाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर डेटा प्रबंधन और खातों की ट्रैकिंग की चुनौती के कारण इन बैंकों में वसूली की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रहती है।

इस समस्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। अक्सर खाताधारक का पता बदल जाना, खाते का विवरण भूल जाना या खाताधारक की मृत्यु होने के बाद उत्तराधिकारियों को जानकारी न होना, रकम के अनक्लेम्ड रह जाने का कारण बनता है। इसके अलावा, छोटे बैलेंस वाले खाते भी लंबे समय तक निष्क्रिय रहते हैं और समय के साथ उनमें ब्याज जुड़ता रहता है, जिससे कुल राशि बढ़ती जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। अभी भी बड़ी संख्या में लोग यह नहीं जानते कि वे अपनी निष्क्रिय जमा राशि को कैसे वापस पा सकते हैं। यही वजह है कि योर मनी योर राइट’ जैसे अभियानों के बावजूद बड़ी रकम अब भी बैंकों में पड़ी हुई है।सरकार इस दिशा में और कदम उठाने की तैयारी में है। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे निष्क्रिय खातों की पहचान कर खाताधारकों या उनके परिजनों से सक्रिय रूप से संपर्क करें। साथ ही, केवाईसी डेटा को बेहतर तरीके से जोड़ने और केंद्रीकृत प्रणाली विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे दावों का सत्यापन आसान हो सके और धोखाधड़ी की संभावना कम हो।

आर्थिक दृष्टि से भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। यदि यह निष्क्रिय धन समय पर लोगों तक वापस पहुंचे, तो यह उपभोग और निवेश को बढ़ावा दे सकता है। वहीं, बैंकों के लिए निष्क्रिय खातों का प्रबंधन अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ और अनुपालन संबंधी चुनौतियां पैदा करता है। कुल मिलाकर, अनक्लेम्ड जमा में तेजी से हो रही वृद्धि और उसकी धीमी वसूली यह संकेत देती है कि केवल अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए लगातार जागरूकता, तकनीकी सुधार और बैंक-ग्राहक के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है, ताकि लोगों की मेहनत की कमाई उन्हें समय पर वापस मिल सके और बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा और मजबूत हो।

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