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चेक डैम से बीरपारा के किसानों को मिला सिंचाई का सहारा, 20 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित

कोंडागांव । जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और खेती-किसानी को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं के निर्माण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में बड़ेराजपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बीरपारा में जल संरक्षण एवं वाटर हार्वेस्टिंग के उद्देश्य से चेक डैम का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। लगभग 19.78 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस जल संरचना से करीब 20 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। चेक डैम के पूर्ण होने से बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर रोककर उसका बेहतर उपयोग किया जा सकेगा और किसानों की वर्षा आधारित खेती पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

खेती किसानी के लिए किसान मानसून पर निर्भर रहते हैं और पर्याप्त बारिश होने पर खेती के लिए पानी उपलब्ध हो जाता है, लेकिन बारिश के बीच लंबे अंतराल अथवा कम वर्षा की स्थिति में किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी तेजी से बहकर निकल जाता था, जिससे उसका पर्याप्त उपयोग कृषि कार्य में नहीं हो पाता था। ऐसे में चेक डैम के माध्यम से वर्षा जल को रोकने और उसका उपयोग खेती के लिए अच्छा विकल्प है।

ग्राम पंचायत बीरपारा में वर्ष 2025-26 में चेक डैम के लिए स्वीकृत यह कार्य जल संरक्षण एवं वाटर हार्वेस्टिंग की श्रेणी में पूर्ण किया गया है। चेक डैम के तैयार होने से बारिश के दौरान बहने वाले पानी को स्थानीय स्तर पर रोककर संरक्षित किया जा सकेगा। इससे आसपास के खेतों में नमी बनी रहने के साथ जरूरत के समय सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। चेक डैम का निर्माण पूरा होने के बाद अब यह जल संरचना ग्रामीणों और किसानों के लिए उपयोग में आने लगी है। बारिश के पानी को रोकने से पानी की उपलब्धता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे उन किसानों को विशेष लाभ होगा, जिनकी खेती पहले पूरी तरह वर्षा पर निर्भर रहती थी।

ग्राम पंचायत बीरपारा की सुशीला साहू बताती हैं कि पहले बारिश कम होने पर किसानों को खेतों में पानी की समस्या का सामना करना पड़ता था। वर्षा पर निर्भरता अधिक होने के कारण फसल को समय पर पानी नहीं मिल पाता था। अब चेक डैम बनकर तैयार हो गया है, जिससे बारिश के पानी को रोककर रखने में मदद मिलेगी और खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में सुविधा होगी। इससे किसानों को खेती में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण कमलेश मरकाम का कहना है कि चेक डैम किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। बारिश के समय पानी को रोकने की सुविधा मिलने से आसपास के खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा। कम बारिश की स्थिति में भी संरक्षित पानी फसल को बचाने में सहायक हो सकता है। सिंचाई सुविधा बढ़ने से किसान खेती में बेहतर प्रबंधन के साथ उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

करीब 20 हेक्टेयर भूमि को मिलेगा सिंचाई का लाभ

चेक डैम के निर्माण से आसपास की करीब 20 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा, जिनके खेत अभी तक मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर रहे हैं। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसान फसल की आवश्यकता के अनुसार समय पर पानी दे सकेंगे। समय पर सिंचाई मिलने से फसल के विकास में सुधार होगा और उत्पादन तथा गुणवत्ता बेहतर होने की संभावना रहेगी। पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को केवल बारिश के भरोसे खेती करने की मजबूरी भी कम होगी। इससे वे उपलब्ध जल संसाधन के आधार पर फसल प्रबंधन की बेहतर योजना बना सकेंगे। सिंचाई सुविधा का असर केवल एक मौसम की खेती तक सीमित नहीं रहेगा। जल उपलब्धता में सुधार होने से किसानों का खेती के प्रति भरोसा बढ़ेगा और वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ कृषि आधारित आजीविका को भी स्थायित्व मिलेगा।

भूजल पुनर्भरण में भी मिलेगी मदद

चेक डैम का एक महत्वपूर्ण लाभ भूजल संवर्धन से भी जुड़ा है। बारिश के पानी को अधिक समय तक रोककर रखने से पानी को जमीन में रिसने का अवसर मिलेगा। इससे आसपास के भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। क्षेत्र के कुओं, बोरवेल और अन्य स्थानीय जल स्रोतों के पुनर्भरण में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

जल संरक्षण की दृष्टि से गांव स्तर पर निर्मित ऐसी छोटी जल संरचनाओं का महत्व काफी अधिक है। बारिश के पानी को गांव में ही रोकना, उसे संरक्षित करना और आवश्यकता के अनुसार कृषि कार्य में उपयोग करना जल प्रबंधन की प्रभावी स्थानीय व्यवस्था तैयार करता है। बीरपारा का चेक डैम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।

जल संरक्षण और कृषि विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रहा जिला

जिले में जल संरक्षण को खेती-किसानी से जोड़ते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी जल संरचनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिनसे वर्षा जल का अधिकतम उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जा सके। जल संरक्षण का उद्देश्य केवल पानी बचाना नहीं, बल्कि उपलब्ध जल को ग्रामीण आजीविका, कृषि उत्पादन और किसानों की आर्थिक मजबूती से जोड़ना भी है। वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में जल की उपलब्धता कृषि की सफलता का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में चेक डैम, तालाब और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से बारिश के पानी को गांव और खेतों के आसपास रोकने से किसानों को बदलती बारिश की परिस्थितियों के बीच खेती को संभालने में मदद मिलती है। बीरपारा में पूर्ण हो चुका चेक डैम इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। यहां जल संरक्षण को सीधे कृषि जरूरत से जोड़ा गया है, ताकि बारिश के पानी का उपयोग खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने और कृषि उत्पादन को मजबूत करने में किया जा सके।

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