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महिलाओं के हुनर से रोशन होंगे दीप, फूलबाती बनाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं बेमेतरा की महिलाएं

लखपति दीदी पहल से झलक, झंकार और गायत्री सेवा महिला स्वसहायता समूहों को मिला स्वरोजगार का अवसर, दीपावली पर बढ़ती मांग से आय में हो रही वृद्धि

रायपुर,

लखपति दीदी पहल से झलक, झंकार और गायत्री सेवा महिला स्वसहायता समूहों को मिला स्वरोजगार का अवसर, दीपावली पर बढ़ती मांग से आय में हो रही वृद्धि

लखपति दीदी पहल से झलक, झंकार और गायत्री सेवा महिला स्वसहायता समूहों को मिला स्वरोजगार का अवसर, दीपावली पर बढ़ती मांग से आय में हो रही वृद्धि

दीपावली का पर्व नजदीक आते ही घर-आंगन को दीपों से रोशन करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी बीच बेमेतरा जिले की महिला स्वसहायता समूहों की सदस्य अपने हुनर और मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। उनके हाथों से तैयार हो रही फूलबाती न केवल दीपावली के दीयों को रोशन करेगी, बल्कि महिलाओं के जीवन में आर्थिक खुशहाली और आत्मविश्वास का नया उजाला भी बिखेरेगी। लखपति दीदी पहल के अंतर्गत जिले के झलक, झंकार और गायत्री सेवा महिला स्वसहायता समूहों की महिलाएं फूलबाती निर्माण को आजीविका का साधन बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बेमेतरा जिले में जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से महिला स्वसहायता समूहों को प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे महिलाएं अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ घर पर ही आय अर्जित करने के अवसर प्राप्त कर रही हैं।

समूह की महिलाओं को मशीन के माध्यम से रुई की फूलबाती बनाने का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण महिलाओं के लिए स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मशीन के संचालन, रुई से फूलबाती तैयार करने की तकनीक, कच्चे माल के उपयोग तथा तैयार उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने के संबंध में जानकारी दी गई। इसके साथ ही समूह को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई, जिससे महिलाओं को मशीन एवं आवश्यक कच्चा माल खरीदने में मदद मिली। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह की महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ फूलबाती निर्माण का कार्य शुरू किया। शुरुआत में महिलाओं के लिए यह एक नया अनुभव था, लेकिन निरंतर अभ्यास और सामूहिक प्रयासों से वे इस कार्य में दक्ष होती गईं।

महिला स्वसहायता समूहों की इस पहल की विशेषता यह है कि महिलाओं को आजीविका अर्जित करने के लिए अपने घर और परिवार की जिम्मेदारियों से दूर नहीं जाना पड़ता। वे सुबह घरेलू कामकाज निपटाने के बाद उपलब्ध समय में समूह के साथ मिलकर फूलबाती निर्माण करती हैं। मशीन की सहायता से फूलबाती तैयार करने का कार्य अपेक्षाकृत सरल होने के कारण महिलाएं कम समय में अधिक उत्पादन कर सकती हैं। इससे उन्हें घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।

समूह की महिलाओं के लिए यह कार्य केवल अतिरिक्त कमाई का साधन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान का आधार भी बन रहा है। पहले जिन महिलाओं की दिनचर्या मुख्य रूप से घरेलू कार्यों तक सीमित थी, वे अब उत्पादन, पैकेजिंग, बिक्री और बाजार से जुड़ी गतिविधियों में भी भागीदारी निभा रही हैं। सामूहिक रूप से कार्य करने से उनमें नेतृत्व क्षमता, आपसी सहयोग और आर्थिक निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।

दीपावली के अवसर पर घरों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर दीप प्रज्वलन के लिए फूलबाती की मांग बढ़ जाती है। इस अवसर को ध्यान में रखते हुए समूह की महिलाएं पूरी लगन और उत्साह के साथ फूलबाती निर्माण में जुटी हुई हैं। त्योहारी सीजन में स्थानीय बाजारों से मिलने वाले ऑर्डर ने महिलाओं के उत्साह को और बढ़ाया है। समूह की सदस्य तैयार फूलबाती की पैकिंग कर उन्हें बाजार तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पादों की बिक्री और विपणन से समूह की आय बढ़ाने के नए अवसर मिल रहे हैं।

महिलाओं की इस पहल को जिला प्रशासन का भी सहयोग और प्रोत्साहन मिल रहा है। अधिकारियों द्वारा समूह की महिलाओं के तैयार उत्पादों की खरीदी किए जाने से उन्हें अपने कार्य को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली है। प्रशासनिक सहयोग, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता ने महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। समूह की महिलाएं अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने उत्पादों के लिए स्थानीय बाजार में पहचान बनाने का भी प्रयास कर रही हैं।

लखपति दीदी पहल का उद्देश्य महिला स्वसहायता समूहों की सदस्यों को स्थायी आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस पहल के अंतर्गत महिलाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता और बाजार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बेमेतरा जिले के झलक, झंकार और गायत्री सेवा महिला स्वसहायता समूहों की फूलबाती निर्माण गतिविधि इसी दिशा में एक उदाहरण बन रही है।

समूह की अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सोनी ने बताया कि जिला प्रशासन से मिले प्रशिक्षण और सहयोग के कारण महिलाओं को फूलबाती निर्माण का कार्य शुरू करने का अवसर मिला। मशीन एवं कच्चे माल की व्यवस्था होने के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से उत्पादन शुरू किया। त्योहारों के दौरान फूलबाती की मांग बढ़ने से समूह की महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। स्थानीय बाजार में मिलने वाले ऑर्डर से महिलाओं में उत्साह है और वे अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

श्रीमती सोनी के अनुसार समूह की महिलाओं की कोशिश है कि फूलबाती निर्माण को नियमित आय के साधन के रूप में विकसित किया जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बन सकें और परिवार की खुशहाली में योगदान दे सकें। इस कार्य से महिलाओं को न केवल आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है, बल्कि परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में भागीदारी निभाने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।

बेमेतरा जिले की महिला स्वसहायता समूहों द्वारा फूलबाती निर्माण की यह पहल बताती है कि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और बाजार के अवसर मिलने पर महिलाएं छोटे स्तर से भी उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं। दीपावली पर जिन फूलबातियों से घर-घर दीप जलेंगे, उनके निर्माण के पीछे महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य के सपने जुड़े हैं।

झलक, झंकार और गायत्री सेवा महिला स्वसहायता समूहों की यह पहल महिला सशक्तिकरण, सामूहिक उद्यमिता और स्थानीय स्वरोजगार का उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। इन महिलाओं के हाथों से तैयार हो रही फूलबाती दीपावली के उजाले के साथ आत्मनिर्भरता और आर्थिक खुशहाली का संदेश भी दे रही है।

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