छत्तीसगढ़ में खाद की कालाबाजारी: तय कीमत से दोगुने दाम पर डीएपी बेचते पकड़ा गया कृषि केंद्र, सील

किसान बनकर पहुंचे अधिकारी, स्टिंग में खुली कालाबाजारी
बलौदाबाजार,.छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और कालाबाजारी को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच बलौदाबाजार जिले में कृषि विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की है। जिले के भाटापारा विकासखंड के करहीबाजार स्थित एक कृषि सेवा केंद्र को किसानों को निर्धारित मूल्य से दोगुने से अधिक दर पर डीएपी खाद बेचते हुए पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान केंद्र को सील कर दिया गया और 47.84 मीट्रिक टन उर्वरक जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 11 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब राज्य के कई हिस्सों में किसान खाद की उपलब्धता और अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें कर रहे हैं। कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
1350 रुपये की बोरी 2700 रुपये में बेची
कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने गुरुवार को विशेष जांच अभियान चलाया। उप संचालक कृषि दीपक कुमार नायक स्वयं किसान के वेश में एक स्थानीय किसान के साथ करहीबाजार स्थित बबला कृषि केंद्र पहुंचे।
जांच के दौरान जब दो बोरी डीएपी खाद की मांग की गई तो विक्रेता ने निर्धारित मूल्य 1350 रुपये प्रति बोरी के बजाय 2700 रुपये प्रति बोरी की दर से खाद बेच दी। दो बोरियों के लिए कुल 5400 रुपये लिए गए। आरोप है कि भुगतान लेने के बावजूद विक्रेता ने बिल नहीं दिया और किसी प्रकार के दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड या बी-1, की भी मांग नहीं की।
कृषि विभाग के अनुसार केंद्र में यूरिया उपलब्ध होने के बावजूद किसान को उसकी बिक्री नहीं की गई। इतना ही नहीं, विक्रेता ने ग्राहक से इस लेन-देन की जानकारी किसी को नहीं देने की बात भी कही।
जांच में स्टॉक और रिकॉर्ड में बड़ा अंतर
लेन-देन के तुरंत बाद पहले से तैनात जिला स्तरीय निरीक्षण दल ने केंद्र पर छापा मारा। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।विभाग के अनुसार पॉस मशीन में 40.50 मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक दर्ज था, जबकि मौके पर 47.84 मीट्रिक टन उर्वरक पाया गया। यानी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 7.34 मीट्रिक टन का अंतर मिला। इसके अलावा 22 बोरी यूरिया और 8 बोरी टीएसपी खाद ऐसी मिली, जिसका विवरण पॉस मशीन में दर्ज नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि यह उर्वरक वितरण प्रणाली और डीबीटी व्यवस्था के नियमों के उल्लंघन का मामला है।
केंद्र सील, 47 बोरी नहीं बल्कि पूरा स्टॉक जब्त
जांच के बाद कृषि विभाग ने केंद्र के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए परिसर को सील कर दिया और वहां उपलब्ध 47.84 मीट्रिक टन उर्वरक जब्त कर लिया। विभाग के अनुसार जब्त खाद का अनुमानित मूल्य 11.09 लाख रुपये है। अधिकारियों ने बताया कि विक्रेता के खिलाफ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा डीबीटी (उर्वरक) से संबंधित विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है।
खरीफ सीजन में बढ़ी निगरानी
खरीफ सीजन शुरू होने के साथ ही राज्य में डीएपी और अन्य उर्वरकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में सरकार और प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को खाद निर्धारित दर पर उपलब्ध हो और कालाबाजारी पर रोक लगे।
बलौदाबाजार की यह कार्रवाई संकेत देती है कि प्रशासन अब केवल दस्तावेजी जांच तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जरूरत पड़ने पर अधिकारियों को किसान बनाकर भी बाजार की वास्तविक स्थिति परखने की रणनीति अपनाई जा रही है। कृषि विभाग का कहना है कि जिले में उर्वरक विक्रेताओं की निगरानी आगे भी जारी रहेगी और किसानों से अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।



