सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्तों में मांगी केंद्र की कार्रवाई

नई दिल्ली। देश में बच्चों और बड़ों में बढ़ते मोटापे पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जंक फूड के पैकेट पर सामने की ओर चेतावनी लेबल लगाने के आदेश को लागू करने के लिए दो हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने एनजीओ ‘3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने खाद्य सुरक्षा के इस मुद्दे को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार से जोड़ा है।
कोर्ट ने खारिज की अंतरराष्ट्रीय मानकों की दलील
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उन दलीलों को साफ तौर पर खारिज कर दिया, जिनमें विकसित देशों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर न हो पाने की बात कही गई थी। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या इस दलील के मुताबिक भारत को एक अविकसित देश ही बने रहना चाहिए? कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार स्वयं इस पर कदम नहीं उठाती है, तो अदालत आगे के निर्देश जारी करेगी।
20 साल में पांच गुना बढ़ा मोटापा, याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता के वकील राजीव शंकर द्विवेदी ने अदालत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों के बाद भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जबकि जंक फूड के सेवन से लोगों की सेहत लगातार बिगड़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2000 से 2022 के बीच स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर 2% से बढ़कर 10% हो गई है। पिछले 20 वर्षों में बच्चों और बड़ों में मोटापे की समस्या पांच गुना तक बढ़ चुकी है।
पैकेज्ड फूड में स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने रेखांकित किया कि अधिक नमक, चीनी, संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) और कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम पैदा करते हैं। आम लोगों को स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद करने के लिए पैकेट पर स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करना बेहद आवश्यक है। यह आदेश ऐसे समय आया है जब सरकार जंक फूड उत्पादों के सामने फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लगाने में झिझकती दिख रही है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड मार्केट में 150% से अधिक की उछाल
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के अति-प्रसंस्कृत (अल्ट्रा-प्रोसेस्ड) खाद्य बाजार में साल 2009 से 2023 के बीच 150% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान देश में मोटापे के मामलों में कथित तौर पर पांच गुना तक की वृद्धि देखी गई है।



