डेंगू में बुखार उतरते ही न हों बेफिक्र, इसी समय बढ़ सकता है शॉक और गंभीर जटिलताओं का खतरा

डेंगू में तेज बुखार कम होना आमतौर पर राहत की खबर लग सकती है, लेकिन यही वह समय होता है जब डेंगू पेशेंट को सबसे अधिक देख-रेख की जरूरत होती है। आम तौर पर डेंगू बीमारी फीब्राइल, क्रिटिकल और रिकवरी- इन तीन चरणों से गुजरती है। कई मरीजों में क्रिटिकल फेज बुखार उतरने के आसपास शुरू होता है और इस दौरान कुछ मामलों में स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
बुखार उतरने के बाद क्यों बढ़ सकता है खतरा?
डेंगू के दौरान बुखार आमतौर पर 2 से 7 दिनों तक रह सकता है। जब तापमान कम होने लगता है, तो इसे अक्सर रिकवरी का संकेत समझ लिया जाता है। लेकिन कुछ मरीजों में इसी समय रक्त वाहिकाओं की वैस्कुलर पर्मैबिलिटी बढ़ सकती है और प्लाज्मा लीक होने लगता है।
इससे रक्त वाहिकाओं के अंदर मौजूद फ्लूड की मात्रा कम हो सकती है। गंभीर स्थिति में ब्लड प्रेशर और रक्त संचार प्रभावित होकर डेंगू शॉक का खतरा बढ़ सकता है।
डेंगू का क्रिटिकल फेज कब आता है?
यह चरण अक्सर बीमारी के तीसरे से लेकर सातवें दिन के बीच देखा जाता बुखार उतरने के आसपास क्रिटिकल फेज शुरू हो सकता है और यह लगभग 24 से 48 घंटे का महत्वपूर्ण समय होता है। हालांकि, बीमारी का समय हर मरीज में एक जैसा नहीं होता। इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि थर्मामीटर पर बुखार कम हो गया है। मरीज की पूरी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
सिर्फ प्लेटलेट्स देखकर न समझें कि खतरा टल गया
डेंगू में प्लेटलेट्स का गिरना आम चिंता होती है, लेकिन सिर्फ प्लेटलेट काउंट से बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती। डॉक्टर मरीज की क्लिनिकल स्थिति के साथ ब्लड प्रेशर, पल्स, यूरिन आउटपुट, हेमाटोक्रिट, हाइड्रेशन और अन्य जांच को भी देखते हैं।
इसका मतलब है कि प्लेटलेट्स कम न होने पर भी मरीज में गंभीर जटिलता विकसित हो सकती है और कम प्लेटलेट्स का मतलब हर स्थिति में गंभीर डेंगू होना नहीं है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
बुखार उतरने के बाद यदि मरीज में इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें या अस्पताल जाएं।
- तेज या लगातार पेट दर्द
- बार-बार उल्टी होना
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- उल्टी या मल में खून आना
- बहुत ज्यादा सुस्ती या बेचैनी
- सांस लेने में परेशानी
- त्वचा का ठंडा या चिपचिपा होना
- पेशाब की मात्रा कम होना
बुखार कम होने पर क्या करें?
इस चरण में डॉक्टर की सलाह के अनुसार मरीज की निगरानी जारी रखें। पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन, पेशाब की मात्रा, व्यवहार और नए लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ मरीजों में डॉक्टर दोबारा ब्लड टेस्ट या क्लिनिकल जांच की सलाह देते हैं।
रिकवरी फेज कब शुरू होता है?
यदि क्रिटिकल फेज बिना गंभीर जटिलता के गुजर जाता है तो रिकवरी शुरू होती है। इस दौरान भूख और सामान्य स्वास्थ्य में सुधार, पेशाब की मात्रा बढ़ना और शरीर के तरल संतुलन का स्थिर होना जैसे बदलाव दिखाई देते हैं।



